*श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर पर धर्मशाला निर्माण कार्य का भूमिपूजन*
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*श्रद्धा की राह में अब मिलेगा सुकून का पड़ाव*
*जनसहयोग से पिटोल की हनुमान गढ़ी में 2500 वर्गफीट में बनेगी धर्मशाला*
निर्भयसिंह ठाकुर पिटोल। मध्यप्रदेश-गुजरात राज्य की सीमा पर सुरम्य पहाड़ी पर स्थित श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर अब पैदल धार्मिक यात्रियों के लिए सुकून का पड़ाव बनेगा। पावागढ़ माताजी के दर्शन के लिए पैदल जाने वाले यात्रियों के साथ ही विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर की तलहटी में करीब 2500 वर्गफीट क्षेत्र में धर्मशाला का निर्माण किया जा रहा है! जनसहयोग और दानदाताओं से प्राप्त राशि से होने वाले इस निर्माण कार्य का रविवार को विधिवत भूमिपूजन किया गया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्रसिंह ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित होने के कारण श्री हनुमान गढ़ी पर आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मध्यप्रदेश से गुजरात के सोमनाथ, पावागढ़, डाकोरजी और द्वारका सहित अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु यहां रुकते हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से बसों के माध्यम से चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्री भी मंदिर परिसर में विश्राम के लिए यहां रुकते हैं। कई यात्री घंटों यहां रुककर भोजन-प्रसादी भी तैयार करते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस धार्मिक स्थल पर यात्रियों के लिए पर्याप्त विश्राम सुविधा नहीं होने के कारण मंदिर समिति ने धर्मशाला निर्माण की पहल की है। धर्मशाला बनने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से रात्रि विश्राम की सुविधा मिल सकेगी।
*उज्जैन सिंहस्थ-2028 में भी यात्रियों को मिलेगा लाभ*
उल्लेखनीय है कि उज्जैन सिंहस्थ-2028 के दौरान मध्यप्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आवागमन की संभावना है। ऐसे में यह धर्मशाला यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होगी। समिति का उद्देश्य है कि धार्मिक यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निःशुल्क रात्रि विश्राम की सुविधा मिल सके। सेवा भावना से शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में यात्रियों के लिए सुकून का ठिकाना बनेगी।

*ग्रामीणों की पहल बन रही प्रेरणा*
पिटोल में ग्रामीणों द्वारा धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में जनसहयोग से किए जा रहे कार्य अब प्रेरणा बनते जा रहे हैं। पूर्व में गांव में मुक्तिधाम की सुविधा नहीं होने पर कुछ युवाओं ने घर-घर जाकर जनसहयोग जुटाया और करीब 10 लाख रुपए की राशि एकत्रित कर भव्य मुक्तिधाम का निर्माण कराया। मुक्तिधाम परिसर में सैकड़ों पौधे भी लगाए गए, जो अब पेड़ों का आकार ले चुके हैं।

अब हनुमान गढ़ी जैसे धार्मिक स्थल को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने का बीड़ा भी ग्रामीणों और मंदिर समिति ने उठाया है। समिति ने श्रद्धालुओं से इस पुनीत कार्य में यथासंभव सहयोग प्रदान करने की अपील की है, ताकि सैकड़ों किलोमीटर पैदल धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के थके कदमों को यहां कुछ पल का सुकून मिल सके।
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