*एलपीजी के नियम कायदे उपभोक्ताओं पर पड रहे भारी*
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*ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन में मिल रहे गैस सिलेण्डर, चूल्हे का लेना पड़ रहा सहारा*
पिटोल (निर्भय सिंह ठाकुर ) मध्य पुर्व में चल रहे तनाव के कारण रसोई गैस की खडी हुई किल्लत को देखते हुवे केन्द्र सरकार ने गैस बुकिंग की जो समय सीमा तय की है उसमें शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन में व ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिनों में बुकिंग के बाद गैस सिलेण्डर उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को खासी परेशानी का सामना करना पड रहा है। दुसरी ओर बताया जा रहा है कि वे उपभोक्ता जिन्होने अब तक अपनी केवाईसी नहीं करवाई है संभवतः उन उपभोक्ताओं को 23 अगस्त के बाद से मंहगे दामों पर यानी कमर्शियल सिलेण्डर की दर से घरेलु सिलेण्डर खरीदना पड सकते है।

*सरकार की नीतियों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश*
संयुक्त परिवारों में जहां उपभोक्ताओं के पास एक ही कनेक्शन है उन्हें 20 से 25 दिनों के बाद ही यह चिंता सताने लग जाती है कि आखिर उन्हें अगले 20 दिनों के लिये खाना पकाने के लिये गैस सिलेण्डर की जुगाड कहां से करना। शहरी ओर ग्रामीण क्षैत्र में समानता न रखते हुवे ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ सरकार की इस नीती को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
आईओसी के सुत्रों की माने तो अभी न तो नऐ कनेक्शनों को लेकर वर्तमान में कोई संभावना नजर आ रही है एवं न ही 25 व 45 दिनों की बुकिंग के नियमों में बदलाव की कोई संभावना ! अब ऐसे में ग्रामीणों के सामने यह बडा संकट खडा हो गया है कि यदि उनके पास घरों में चुल्हे की व्यवस्था न हो तो वे अपने परिवार को दो वक्त की रोटी बनाने के लिए ईंधन की व्यवस्था करें तो कैसे।
*शहरो को सुविधा और ग्रामीण हो रहे परेशान*
महिला उपभोक्ता नर्मदा बबेरिया ने बताया कि धुंऐं से मुक्ति के स्लोगन के बाद सही में उन्हें ऐसा लगा था कि उज्जवला योजना में मीले कनेक्शनों के बाद उनके जीवन व दिनचर्या में बडा बदलाव आया है किंतु गत 5 माह से महिलाओं की जिंदगी फिर से धंुऐं के बीच उलझकर रह गई है। उज्जवला योजना का उद्देश्य महिलाओं को धंुऐ से बचाना था लेकिन इस नियम के कारण महिलाओं को मजबूरी में चुल्हे पर खाना बनाना पड रहा है। कुछ लोग शहरों में जाकर मंहगे दामों पर या रिश्तेदारों से सिलेण्डर लाकर अपना काम चला रहे है। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि “राखी” का त्योंहार करीब है सरकार इस दिन से ही सही उन्हें वे अपने पुराने 25 दिन की बुकिंग पर वापस लौटाऐ जिससे वे अपनी रसोई का संचालन ठीक से कर सके।
इन्होंने कहा
ग्रामीण क्षेत्रों मे व शहरी क्षेत्र में शासन ने जो समय सीमा तय की है वह अभी यथावत है! ग्रामीणों को हो रही परेशानी के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को वीसी में अवगत कराया था किंतु अभी इसमें कोई बदलाव नहीं किए गए हैं!
संजय पाटिल (कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जिला खाद्य विभाग झाबुआ)
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