*पिटोल में भागवत कथामृत का शुभारंभ, राधाष्टमी पर उमड़ी श्रद्धा*
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*संत रघुवीर दासजी महाराज ने कहा—सत्संग से मिलता है भक्ति का मार्ग, कथा श्रवण से आत्मिक शांति*
पिटोल(निर्भय सिंह ठाकुर) स्थानीय राधा-कृष्ण मंदिर में शुक्रवार से भागवत कथामृत का शुभारंभ हुआ। तलवाड़ा द्वारकाधीश गौशाला के संत रघुवीर दासजी महाराज के मुखारविंद से 19 से 26 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान राधाष्टमी का पर्व भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।

महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में सहज प्रेम और अनुराग धीरे-धीरे अधोगति की ओर जा रहा है। मनुष्य जैसे-जैसे धर्म और भगवान से विमुख होता जा रहा है, वैसे-वैसे उसका जीवन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक जन्मों के पुण्य एकत्रित होने पर सत्संग प्राप्त होता है। संसार की चर्चा करने में मनुष्य घंटों लगा देता है, लेकिन भगवान की कथा सुनने में शरीर में दर्द होने लगता है। यह मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन से दूर होने का संकेत है।

उन्होंने कहा कि भागवत कथामृत भगवान का शाब्दिक अवतार है। कथा भगवान को हृदय में विराजमान करने का माध्यम है। कथा श्रवण मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आत्मरंजन और आत्मिक शांति के लिए किया जाता है।
*राधारानी की भक्ति से मिलता है द्वारकाधीश तक पहुंचने का मार्ग*
राधाष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि जीवन में द्वारकाधीश के दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं को श्री राधारानी का आश्रय लेना चाहिए। राधारानी की भक्ति भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करती है।
कथा के दौरान विभिन्न भजनों की प्रस्तुति विपिन भट्ट ने दी। तबले पर डूंगरपुर के ओमप्रकाश जेठवा ने संगत की। प्रधान गायन एवं कोरस पं. नरेंद्रजी आचार्य ने किया, जबकि भागवत पारायण पं. शैलेश भट्ट द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान झाबुआ के सत्यनारायण मंदिर एवं राधे-कृष्ण मंदिर समिति की ओर से महाराज का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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