*आस्था की 170 किमी की पदयात्रा, बावन गज की ध्वजा व रथ लेकर पावागढ़ रवाना हुए आदिवासी श्रद्धालु*
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*चार दिन में पूरी होगी यात्रा, झाबुआ जिले के छोटी बावडी गांव से हर साल महिला-पुरुष पैदल पहुंचते हैं मां महाकाली के दरबार*
*पिटोल (निर्भय सिंह ठाकुर ) आस्था, श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब झाबुआ जिले के बावड़ी गांव से आदिवासी श्रद्धालुओं का जत्था बावन गज का माता के मंदिर के लिए ध्वज लेकर गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पावागढ़ के लिए रवाना हुआ। मां महाकाली के प्रति अटूट आस्था लिए निकले इस जत्थे में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हैं। करीब 170 किलोमीटर की यह पदयात्रा चार दिनों में पूरी की जाएगी।

आदिवासी समाज में वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के तहत गांव के श्रद्धालु प्रतिवर्ष पैदल यात्रा कर पावागढ़ पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु माता की चुनरी या ध्वज लेकर भक्ति भाव के साथ आगे बढ़ते हैं। उनके चेहरे पर मां के दर्शन की उत्सुकता और मन में अपनी आराध्य देवी के प्रति गहरी आस्था नजर आती है।

*परंपरा के साथ निभा रहे आस्था का संकल्प*
पगपाला यात्रा संघ के बैनर तले सीताराम महाराज एवं पान सिंह भाबोर की अगुवाई में बावड़ी गांव से पावागढ़ गुजरात तक की यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक भी है। महिला और पुरुष श्रद्धालु मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। लगभग 170 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर श्रद्धालु मां महाकाली के दरबार में बावन गज की ध्वजा अर्पित करेंगे और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करेंगे।


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